सावरकर को कोर्स की  किताबों से बाहर ... ... !!चमचा चाकरों को सावरकर से दिक्कत  ☝️ है

क्योकिं बलिदानी देशभक्ति से समाज विद्युत स्फूर्ति पाता है 
और दिखावटी हल्ला मचा विरासतों को हथियाने वालों की देशभक्ति के आगे लूट की दुकानें बंद होने लगती है  !!
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आजादी के समय से अब सौभाग्य से कई दशकों का अंतराल बीत गया देशभक्ति का प्रवाह तेज हुआ है जिसमे कुल कुनबा कब्जा धारियों और गुलाम चमचो चाकरों की चाकरी सब धरी रह कर वास्तविक लोकतंत्र देश में आ रहा है  !!
और इन रावणों की लंका उजड रही है
        इस जागरण के पुरोधा है *तिलक *गोखले *भगत *बोस *सावरकर  जिनको जान समझ पढ कर आज की पीढ़ी "राष्ट्रहित सर्वोपरि " पर गंभीर है !!  विचारणीय यह है कि आजादी के इतने दशकों बाद आज इन वर्षो में यह जीवित बलिदान पढाये जा रहे हैं  ।।
   आज फिर इसलिए राजनैतिक रक्तपिपासु खटमलों को खुजली बढ गई है  !!

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