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अति पिछड़ा वर्ग को पांच प्रतिशत विशेष आरक्षण दिलवाने वाले कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला 81 वर्ष की उम्र में निधन।

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अति पिछड़ा वर्ग को पांच प्रतिशत विशेष आरक्षण दिलवाने वाले कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला 81 वर्ष की उम्र में निधन। एक अप्रैल को करौली के मुंडिया गांव में होगा अंतिम संस्कार। पुत्र विजय बैंसला होंगे उत्तराधिकारी। ======================= 31 मार्च को सुबह #जयपुर के मणिपाल अस्पताल में कर्नल किराड़ी सिंह बैंसला का निधन हो गया। 81 वर्षीय बैंसला ने राजस्थान में गुर्जर सहित पांच अति पिछड़ा वर्ग की जातियों को पांच प्रतिशत विशेष आरक्षण दिलवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। गुर्जर समुदाय को ओबीसी वर्ग के बजाए अति पिछड़ा मानकर अलग से आरक्षण देने की मांग के लिए कर्नल बैंसला ने सबसे पहले राजस्थान में गुर्जर आंदोलन की शुरुआत की। इसे कर्नल बैंसला का करिश्मा ही कहा जाएगा कि राजस्थान भर के गुर्जर एकजुट हुए और सवाई माधोपुर की रेल पटरियों पर बैठ कर लंबा संघर्ष किया। भाजपा के शासन में कई गुर्जरों की मौत हो जाने के बाद भी कर्नल बैंसला ने अपने आंदोलन को जारी रखा। प्रदेश में सरकार कांग्रेस की हो या भाजपा दोनों ही सरकारों में बैंसला ने अपने आंदोलन को जारी रखा। इसी का परिणाम रहा कि गुर्जर सहित पांच पिछड़ी जातियों ...
अफगानिस्तान जैसे मुस्लिम राष्ट्र की सेना आखिर तालिबानियों से क्यों नहीं लड़ी? तालिबानी तो 75 हजार ही हैं, जबकि अफगानिस्तान की फौज तीन लाख 50 हजार की है। तो क्या मुस्लिम राष्ट्रों ने भी अफगानिस्तान के लोगों को ताबिलान के भरोसे छोड़ दिया है। 1997 में इसी तालिबान ने तब के राष्ट्रपति नजीबुल्लाह को मार कर शव को राष्ट्रपति भवन के सामने ही लटका दिया था, इसलिए मौजूदा राष्ट्रपति अशरफ गनी पहले ही भाग गए। ========== राजधानी काबुल सहित पूरे अफगानिस्तान पर मुस्लिम कट्टरपंथी सोच वाले संगठन तालिबान का कब्जा हो गया है। उम्मीद है कि तालिबान के प्रमुख नेता मुल्ला अब्दुल गनी बरादर अफगानिस्तान के नए राष्ट्रपति बन जाएंगे। अफगानिस्तान पर तालिबान का तब कब्जा हुआ है, जब अमरीका की फौज चली गई। अमेरिकी सेना के अधिकारियों का कहना था कि अब अफगानिस्तान की फौज इतनी समक्ष हो गई है कि तालिबान के लड़कों से लड़ सकती है, लेकिन पूरी दुनिया ने देखा कि तालिबान के सामने अफगानी फौज ने चुपचाप सरेंडर तक कर दिया। तालिबानी लड़ाकों को कहीं भी सेना के साथ संघर्ष नहीं करना पड़ा। सवाल उठता है कि क्या एक मुस्लिम राष्ट्र की सेना इतन...

राजस्थान के युवाओं को नशे में धकेलने की पाकिस्तानी कोशिश..पढ़े यह जानकारी..ब्लॉगर-अर्जुन चांदना

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 राजस्थान के युवाओं को नशे में धकेलने की पाकिस्तानी कोशिश..पढ़े यह जानकारी..ब्लॉगर-अर्जुन चांदना                                 Blog-----राजस्थान के युवा प्रगतिशील सोच और विकास की राजनीति में विश्वास करने वाले हैं। इसके बावजूद पिछले कुछ समय से पश्चिमी राजस्थान के युवा नशे की ओर अग्रसर हो रहे हैं, जो कि प्रदेश के भविष्य के लिए एक बहुत ही ख़तरनाक संकेत है। राजस्थान में सर्वाधिक हाडौती,मेवात, मारवाड़, व शहरी क्षेत्रों में युवाओ को नशे की लत ज्यादा है। आप में से कई लोग जानते होंगे कि किस तरह पंजाब में नशीले पदार्थों ने सम्पूर्ण रूप से प्रदेश को खोखला कर दिया है। हमें इसके पीछे हमारे पडोसी देश पाकिस्तान की नापाक साजिश को समझना होगा। पाकिस्तान जानता है कि यदि भारत के युवा नशे के जहर में मिल जाएंगे तो देश को अपना समय और अपनी काबिलियत और मेहनत से आगे नहीं ले जा पाएंगे।  राजस्थान की सीमा से लगे गाँवों के जरिये नशीले पदार्थों की तस्करी के द्वारा हमारे देश और खास तौर से उत्तर पश्चिमी क्षेत्र  राजस्थान को क...

पिता वारिया ते लाल चार वारे..एक ऐसा वीर योद्धा जिसने धर्म की खातिर पूरा वंश कुर्बान कर इतिहास बना दिया... जानिए कोन है?-

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 पिता वारिया ते लाल चार वारे..एक ऐसा वीर योद्धा जिसने धर्म की खातिर पूरा वंश कुर्बान कर इतिहास बना दिया... जानिए कोन है?-  ब्लॉग- इन पुत्रं के शीश पर वार दिए सूत चार, चार मुये तो क्या हुआ जीवित कई हजार...जी है यह पंक्तियां दशमेश पिता गुरु गोविंद सिंह जी महाराज के लिए ठीक बैठती है। विश्व के एकमात्र ऐसे सिंह योद्धा जिनकी लड़ाई न राज्य की सीमा के लिए थी, न धन के लिए और न ही किसी अन्य लालसा के लिए था ... वो संघर्ष था तो मात्र धर्म की रक्षा हेतु धर्म की रक्षा के लिए आमरण युद्ध ... महाभारत था धर्म युद्ध और अर्जुन से बड़ा धनुर्धारी न पैदा हुआ। लेकिन पुत्र अभिमन्यु वध का समाचार मिलते ही दुःख और क्षोभ से गांडीव फ़िसल गया, पैर काँप गया, दूसरा दृष्टांत अर्जुन के गुरु द्रोण आचार्य अपने पुत्र अश्वत्थामा की मृत्यु के झूठे ख़बर मात्र से धनुष रख के रोने लगे और युद्ध बंद कर दिया .... पुत्र से बिछड़ने मात्र के संताप से देवासुर संग्राम के विजेता चक्रवर्ती सम्राट महाराज दशरथ भी गिर पड़े और फिर न उठे ...ऐसे में दशमेश गुरु गोविंद सिंह मात्र एक ऐसे देवतुल्य महापुरुष हुए, जिन्होंने अपने चार पुत्रों क...

जानिए चंपत राय कौन हैं,? जिसने अपना संपूर्ण जीवन राम मंदिर के लिए न्योछावर कर दिया

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 जानिए चंपत राय कौन हैं,? जिसने अपना संपूर्ण जीवन राम मंदिर के लिए  न्योछावर कर दिया..  ब्लॉग--- राम मंदिर के लिए जमीन को खरीदने के चलते इस समय चंपत राय सुर्खियों में बनी हुई वहीं आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने जमीन खरीद को लेकर हाल ही में बयान दिया! जिसको लेकर विश्व हिंदू परिषद के नेता चंपत राय ने स्पष्टीकरण दिया और श्रद्धालुओं को राजनीति से प्रेरित बयानों पर भरोसा नहीं करने के लिए कहा है! क्या आपको मालूम है राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने अपना पूरा जीवन इसी मंदिर के लिए संघर्ष करते हुए खपा दिया है? प्रभु श्री राम के मंदिर के निर्माण के लिए विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय का एक अहम किरदार हैं! मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बिजनौर स्थित है नगीना कस्बे के सरायमीर मोहल्ले के निवासी चंपत राय के पिता का नाम रामेश्वर प्रसाद बंसल और माताजी का नाम सावित्री देवी था! नवंबर 18 साल 1946 में जन्मे चंपत राय की उम्र 75 वर्ष से भी ज्यादा है उनके पिता भी अपने शुरुआती दिनों से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हुए हैं! वहीं दूसरी और चंपत राय...

रूप बदल बदल कर अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे वामपंथी..

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 रूप बदल बदल कर अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे वामपंथी..  वामपंथ अर्थात कम्युनिष्ट(left)  दुनिया भर से समाप्ति के कगार पर है, और वर्तमान में अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। भारत में कभी अपनी जड़ें जमा चुकी वामपंथी विचारधारा ने लोगों का विकास नहीं होने दिया और इसलिए 2014 में देश में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी की सरकार आने के बाद से वामपंथी लगातार अपना रूप बदलकर देश विरोधी शक्तियों को बहकाने में लगे हुए हैं। शायद, इसलिए उनको आंदोलनजीवी का नाम दिया गया है। आंदोलनजीवी इसलिए क्योंकि एक आंदोलन में असफलता हाथ लगती है तो रूप बदलकर वे दूसरे आंदोलन में जुट जाते हैं। वामपंथ की विचारधारा में हिन्दुओं की चिंता करने वाले  संगठनों को ‘दक्षिणपंथी’ कहा जाता है। यहां की हिन्दू-चिंताएं अमेरिका या अफ़्रीका के मूल निवासियों की चिंताओं से अलग नहीं हैं। पश्चिमी सांस्कृतिक, व्यापारिक, धार्मिक दबावों के विरुद्ध हिन्दुओं का विरोध उसी तरह का है, जो अमेरिका में रेड-इंडियन या ऑस्ट्रेलिया में एबोरिजनल समुदायों का है। पश्चिमी देशों के वामपंथी अमेरिका और अफ़्रीका के मूल निवास...

27 वर्षीय William James अपने करोड़ो का व्यापार छोड़कर एक हिन्दू सन्यासी बन गये

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 27 वर्षीय William James अपने करोड़ो का व्यापार छोड़कर एक हिन्दू सन्यासी बन गये। Williams ने भगवद् गीता के कुछ श्लोक अनजाने में हीं इन्टरनेट पर पढ़े और उसके बाद वे हिंदुत्व के प्रति इतना आकर्षित हुए कि उन्होंने अपने करोड़ो का व्यापार त्याग दिया। और यहाँ हम भगवद् गीता का महत्व जानते हुए भी उसको नहीं पढ़ रहे हैं। अब भी समय है श्रीमदभगवदगीता को खुद भी पढ़ें और बच्चों को भी पढ़ाएं। विश्वास रखिये जीवन मे सब कुछ अच्छा होने लगेगा।भगवद् गीता मात्र श्लोकों का संग्रह नहीं, अपितु जीवन जीने की कला एवं उद्देश्य है। संपूर्ण ब्रम्हाण्ड का सार है यह।भगवान श्रीकृष्ण ने आत्मा की तृप्ति का मार्ग दिया है। इससे अछूता इंसान नदी के किनारे बैठकर भी प्यासा रह जाने वाली कहावत को चरितार्थ करता है। ADV. ARJUN CHANDNA BLOGGER (दिनांक)Website- www.advarjunschandna.in Facebook Page- www.facebook.com/adv arjun chandna Follow me on Twitter- https://twitter.com/arjunSChandna1 Blog- arjunsinghchandna.blogspot.com To Contact- 9461788594 To Add in WhatsApp Group- 9462020994 Email- arjuns.jlwr99@gmail.com